इटली से 25 दिन बाद रामखेड़ी पहुंचा गगनप्रीत का शव, नम आंखों से दी अंतिम विदाई; परिवार ने एजेंट पर लगाए गंभीर आरोप

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यमुनानगर के गांव रामखेड़ी में उस समय माहौल गमगीन हो गया जब 25 दिन बाद इटली से गगनप्रीत का शव गांव पहुंचा। जैसे ही एंबुलेंस गांव में पहुंची, परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव की मौजूदगी में गगनप्रीत का अंतिम संस्कार किया गया।

गगनप्रीत का शव पहुंचा उसके गांव।


गगनप्रीत अपने परिवार का इकलौता बेटा था। वह 8 अप्रैल 2023 को अपने पिता के इलाज के लिए पैसे कमाने इटली गया था। परिजनों के अनुसार उसके पिता पिछले करीब 18 वर्षों से गंभीर बीमारी के कारण चारपाई पर हैं। बेटे को विदेश भेजने के लिए परिवार ने अपनी जमीन बेचकर लगभग 18 लाख रुपये खर्च किए थे।

गगनप्रीत की फोटो जब वो इटली पहुंचा था।


परिवार का आरोप है कि विदेश भेजने वाले एजेंट ने पूरी रकम नकद ली थी। इटली पहुंचने के बाद गगनप्रीत ने 11 अप्रैल 2023 से काम शुरू किया। परिजनों का कहना है कि वह खेतों में काम करता था और उसी एजेंट के संपर्क में रहता था।
करीब एक साल बाद जब उसने अपने दस्तावेज और मेहनताना मांगा तो कथित रूप से उसे टाल दिया गया। परिवार का दावा है कि उसे पूरी मजदूरी नहीं दी गई और वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगा।

गगनप्रीत के साथ की गई मारपीट की तस्वीर।


4 फरवरी 2026 की शाम को उसके साथ काम करने वाले युवक ने फोन कर परिवार को सूचना दी कि गगनप्रीत की तबीयत खराब होने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।


शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 दिन बाद गांव में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हर आंख नम थी और परिवार बेसुध हालत में था।

अंतिम विदाई देने पहुंचे सगे सम्बन्धी।

ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और विदेश भेजने वाले एजेंटों की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की है। परिवार प्रशासन से न्याय और सहायता की गुहार लगा रहा है।

गगनप्रीत को दी मुखाग्नि।