यमुनानगर में 70 करोड़ का धान घोटाला: 4 अधिकारी बर्खास्त, DFSC के 3 इंस्पेक्टर और 1 AFSO पर कार्रवाई

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📍यमुनानगर|बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप
हरियाणा के यमुनानगर जिले में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले में सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए चार अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई में जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (DFSC) के तीन इंस्पेक्टर और एक AFSO (असिस्टेंट फूड सप्लाई ऑफिसर) शामिल हैं।
यह कार्रवाई उस समय की गई जब धान के स्टॉक मिलान (Stock Verification) के दौरान बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं।

प्रतीकात्मक फोटो।

🔍 कैसे खुला 70 करोड़ का घोटाला?
जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा जब मंडियों और गोदामों में रखे धान का रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया गया, तो भारी अंतर सामने आया।
रिकॉर्ड में दिखाया गया धान और वास्तविक स्टॉक में बड़ा फर्क पाया गया
कई जगहों पर फर्जी एंट्री और कागजी हेरफेर के संकेत मिले
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से राइस मिलर्स को फायदा पहुंचाया गया।
इसी गड़बड़ी के आधार पर पूरे मामले की जांच तेज की गई और आखिरकार जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।

⚖️ किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
सरकार ने प्राथमिक जांच के बाद चार अधिकारियों को सीधे बर्खास्त कर दिया:
DFSC विभाग के 3 इंस्पेक्टर
1 AFSO (Assistant Food Supply Officer)
इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए धान खरीद, भंडारण और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की।

प्रतीकात्मक फोटो

🚔 पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
इस घोटाले में इससे पहले भी बड़ा एक्शन लिया जा चुका है।
हैफेड (HAFED) से जुड़े एक सीनियर मैनेजर की गिरफ्तारी भी हो चुकी है
आरोप है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर राइस मिलरों को अनुचित लाभ दिया गया
इससे साफ है कि यह मामला केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि संगठित स्तर पर किया गया घोटाला हो सकता है।

📊 कितना बड़ा है मामला?
घोटाले की राशि: करीब 70 करोड़ रुपये
विभाग: खाद्य एवं आपूर्ति / हैफेड
स्तर: जिला स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक पहुंच
यह हरियाणा के हाल के समय के बड़े खाद्यान्न घोटालों में से एक माना जा रहा है।

🗣️ आगे क्या होगा?
मामले की विस्तृत जांच जारी है
और भी अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो रही है संभावना है कि आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं
📌 निष्कर्ष
यमुनानगर का यह धान घोटाला यह दिखाता है कि किस तरह सरकारी सिस्टम में मिलीभगत से करोड़ों का नुकसान हो सकता है। हालांकि, अब सरकार द्वारा की गई सख्त कार्रवाई से साफ है कि इस मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है।